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गंगा की निर्मलता जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अमृतानंद जी ने अखाड़ा परिषद् का किया समर्थन-अनेक हिन्दू संगठनों भी हुए साथ
July 11, 2020 • उत्तराखण्ड ब्यूरो

हरिद्वार | अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरी और श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण के महंत व कुम्भ मेला प्रबंधक श्री दुर्गा दासजी महाराज जी द्वारा गंगा को स्कैप चैनल बनाने वाले सरकारी अध्यादेश के विरोध को अब शारदा सर्वज्ञ पीठ, काश्मीर के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अमृतानंद देव तीर्थ जी का भी समर्थन प्राप्त हो गया है. जगद्गुरु स्वामी अमृतानंद ने पत्र द्वारा अखाड़ा परिषद् को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया.

      श्री मा योग शक्ति दिव्य धाम ट्रस्ट, कनखल के ट्रस्टी श्री इंद्र मोहन मिश्र ने बताया कि 2016 में हरीश रावत की सरकार द्वारा एक आदेश से हरिद्वार के इस पावन तीर्थ में सदियों से प्रवाहित गंगा के अनेक घाटों को गंदे नाले में परिवर्तित कर दिया है, जिनमें  सुभाष घाट, गऊ घाट, कुशा घाट, हनुमान घाट, श्रवण घाट, राम घाट, विष्णु घाट, बिरला घाट, राज घाट, विश्वकर्मा घाट, कबीर घाट, हरिगिरी संन्यास आश्रम घाट से पाइलट बाबा घाट आदि अनेक घाटों में गंगा के निर्मल जल के स्थान पर सीवरेज का गन्दा मल बह रहा है, जो कि हरिद्वार तीर्थ के लिए बहुत ही चिंता का विषय      

      गंगा की निर्मलता व शुद्धि के लिए अखाड़ा परिषद्  के इस पुनीत कार्य में हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश कौशिक का भी अखाड़ा परिषद् को लिखित आश्वासन प्राप्त हुआ. उन्होंने कहा कि  वर्तमान में कोराना महामारी के चलते सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अमरनाथ यात्रा, कावंड यात्रा और चार धाम यात्रा प्रतिबन्धित हो चुकी है, किन्तु यदि शीघ्र ही समाधान नहीं निकाला तो अगले वर्ष हरिद्वार कुम्भ के उचित प्रबंध व्यवस्था पर भी ग्रहण लग जाएगा. 

     हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने भी गंगा को दूषित करने वाले सरकारी आदेश को वापस लेने की अपील की और अखाड़ा परिषद् का खुलकर समर्थन किया.  गंगा हमारी सनातन संस्कृति की प्राण प्रवाहिका है. गंगा को नाला कहना और उसे प्रदूषित करने वाले अधिकारीयों व जिम्मेदार व्यक्तियों को दण्डित किया जाना चाहिए. आने वाले 21 के हरिद्वार कुम्भ की तैयारियां शुरू होने से पूर्व हर की पैड़ी से सती घाट तक गंगा को स्कैप चैनल का कलंक मिटाने के लिए अखिल भारत हिन्दू महासभा आपको हर संभव सहायता देने का आश्वासन देती है.   

 

      ज्ञात हो कि उत्तराखण्ड की  पिछली कांग्रेसी सरकार ने 14 दिसम्बर 2016 को आर. मीनाक्षी, सचिव, उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी एक आदेश में स्पष्ट रूप से हर की पैड़ी, ब्रह्म कुण्ड में बहने वाली गंगा को एक नाला बताया. जो भी ही दुर्भाग्य पूर्ण कृत्य हुआ.
     मुख्य प्रशासक, आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण, देहरादून को ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों का सन्दर्भ देते हुए माँ गंगा को एक नाले के रूप में उल्लेखित करते हुए उसमें हरिद्वार शहर के सीवरेज से मल-मूत्र डालने की अनुमति प्रदान की गयी. 
     माँ गंगा नदी के दिव्य स्वरुप जो मुख्य धारा के साथ ही सर्वानंद घाट से सुखी नदी होते हुए हर की पैड़ी ब्रह्म कुण्ड होकर कनखल सती मंदिर तक प्रवाहित होता है. देश विदेश से सनातन धर्म के श्रद्धालु माँ गंगा की इसी अविरल धारा में धार्मिक अनुष्ठान, तर्पण आदि पवित्र कर्मों को युगों से करते आए हैं. जबकि पिछली उत्तराखंड सरकार का ऐसा आदेश हिन्दू समाज पर एक कलंक साबित हो रहा है. इस बात पर भी आश्चर्य हो रहा है कि वर्तमान में भाजपा सरकार भी इस आदेश को निरस्त करने में किस कारण से विलम्ब कर रही है. 
      ऐसे में गंगा की निर्मलता को दूषित होने से बचाने के लिए आपका महान प्रयास शीघ्र ही सफल होगा. ऐसी हम आशा करते हैं कि वर्तमान सरकार माँ गंगा को स्कैप चैनल यानि नाला घोषित  करने के आदेश व उसमें किसी प्रकार की गंदगी को डालने वाली सीवर लाइन को बंद कर माँ गंगा की धारा को निर्मल करेगी. 
    रती पर अवतरित होने के बाद माँ गंगा हरिद्वार में प्रवाह से बहने लगी, जिसमें सर्वानन्द घाट, खड्खडी शमशान घाट, हरी की पैड़ी-ब्रह्मकुण्ड भगवान्  श्रीहरि के श्री चरणों पर बहुत ही दिव्य स्वरुप में विद्यमान है. पवित्र नगरी हरिद्वार के मुख्य घाट के रूप में भी हर की पैड़ी का महत्व है, क्योंकि समुद्र मंथन से निकले अमृत की बूँदें हरिद्वार में यही श्री नारायण के चरणों में गिरी थी.  
     इसके उपरान्त माँ गंगा कुशावर्त घात जिसे कुशा घाट के नाम से जाना जाता है, यहाँ साल भर श्राद्ध कर्म होता है, साथ ही देव कार्य भी संपन्न होते हैं. भगवान ने दत्तात्रेय ने इसी स्थान पर तपस्या की थी जिस पर गंगा मैया ने कुशा को नहीं उखड़ने दिया, इसी कारण से इसे कुशावर्त घाट कहा जाता है. इसके उपरान्त  डामकोठी से सती घाट में माँ गंगा प्रवाहित हो रही है, यहाँ भी अस्थि विसर्जन के लिए वर्ष भर श्रद्धालु आते हैं. यहाँ से राजघाट से होते हुए कनखल के श्मशान घाट फिर दक्ष प्रजापति घाट होते हुए माँ गंगा अपने सनातन स्वरुप में बह रही हैं.